वेव सिटी: किसानों के नाम पर राजनीति या विकास की राह में रोड़ा ?

गाजियाबाद। देश की सबसे बड़ी हाईटेक सिटी बनने जा रही वेव सिटी के खिलाफ किसानों के नाम पर अराजक तत्व माहौल बना रहे हैं। ये अराजक तत्व नहीं चाहते हैं कि जिले में देश का सबसे सुव्यस्थित सिटी का विकास हो सके। इसके लिए छोटे—मोटे किसानों को मोहरा बनाकर ये अराजक तत्व अपनी दुकान चमका रहे हैं। गौरतलब है कि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और नई दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से अच्छी कनेक्टिविटी के कारण वेव सिटी की लोकेशन लोगों को प्रभावित कर रही है। इसी वजह से लोग भीड़—भाड़ वाली जगह से निकलकर वेव सिटी में अपना ठिकाना बना रहे हैं। जो कि यहां के अराजक तत्वों को रास नहीं आ रहा है। इसलिए समय—समय पर कभी वेव सिटी के बाहर तो कभी गाजियाबाद विकास प्राधिकरण या अन्य सक्षम सरकारी स्थलों पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। जबकि वेव सिटी के निर्माण का कार्य सरकार और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के नियमों के तहत किया जा रहा है।
बार—बार मुआवजे की जो बात उठती है उसमें कोई भी सच्चाई नहीं बल्कि असल सच्चाई यह है कि तय नियमों के तहत किसानों को मुआवजा दिया गया ताकि वेव सिटी प्रबंधन निर्माण कार्य सुचारु रुप से कर सके। एक रिपोर्ट के अनुसार, वेव ग्रुप ने 2009-10 में राज्य की हाई-टेक टाउनशिप नीति के तहत तकनीक-एकीकृत घरों और विशाल हरित क्षेत्र के साथ टाउनशिप परियोजना शुरू की थी। जो अब एक बड़ा आकार ले चुकी है। बीच में किसानों के विरोध के कारण परियोजना पर जरुर असर पड़ा था लेकिन अब कोर्ट के आदेश के बाद परियोजना सुचारु रुप से चल रही है। जिसके कारण अब यहां खरीददारों की मांग भी बढ़ती जा रही है। वेव सिटी की लोकप्रियता का एक कारण यह भी है कि यहां रहने वाले स्थानीय निवासियों को जहां पर्यावरण अनुकूल माहौल मिल रहा है वहीं सुरक्षित वातावरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसकी प्लानिंग इस तरह से की गई है कि मध्यम वर्ग के लोग भी अत्याधुनिक सुख सुविधाओं का आनंद एक जगह प्राप्त कर सकते हैं। इस सिटी की मास्टर प्लानिंग दुनिया के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग फर्म ने किया है जिसकी वजह से यह परियोजना केवल गाजियाबाद की नहीं बल्कि देश भर की अनूठी परियोजनाओं में से एक है

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