उत्तर प्रदेश: हमारे सामने दो ख़बरें हैं। दोनों ख़बर उत्तर प्रदेश से हैं। एक ख़बर पीलीभीत से है, तो दूसरी नौएडा से है। पीलीभीत वाली ख़बर थोड़ी सी पुरानी है तो नौएडा वाली ख़बर इसी सप्ताह की है। लेकिन यह महज़ इत्तेफाक ही है कि दोनों घटना लगभग एक जैसी हैं। पीलीभीत के शुभम तिवारी की कार अनियंत्रित होकर तालाब में जा गिरी थी, उसी तालाब में एक छोर पर मछली पकड़ रहे फैसल ने शुभम तिवारी की जान बचाने के लिए अपनी जान की बाज़ी लगा दी। तालाब के किनारे खड़े लोगों की साँसें अटकी थीं, शुभम को ज़िंदा बचाने की जद्दोजहद में फैसल की नाव डूब गई, लेकिन उसने शुभम तिवारी का हाथ नहीं छोड़ा और आखिरकार उसमे शुभम को ज़िंदा बचा लिया। सबने फैसल की बहादुरी और इंसानियत को बचाने की उसकी कामयाब कोशिश की सराहना की, मालूम नहीं इस गणतंत्र फैसल नामी पीलीभीत के उस ‘फरिश्ते’ को सरकार सम्मान देगी या नहीं! लेकिन इतना तय है कि उसने एक इंसान की जान बचाकर इंसानियत को डूबने से बचा लिया। इस संवाददाता ने उसे तब भी सैल्यूट किया था और अब भी सैल्यूट कर रहा है। फैसल ज़िंदाबाद! इंसानियत ज़िंदाबाद!
अब दूसरी ख़बर देखिए! इंजीनियर युवराज मेहता गुरुग्राम से ग्रेटर नोएडा अपने घर जा रहे थे। उन्हें कोहरे के कारण कुछ दिखाई नहीं दिया, उनकी कार का संतुलन बिगड़ा, और कार सड़क किनारे बनी दीवार को तोड़कर एक मॉल के निर्माणाधीन बेसमेंट में जा गिरी, बेसमेंट में पानी भरा हुआ था लिहाजा कार डूब गई।
युवराज मेहता पूरे दो घंटे तक खुद को बचाने के लिए चिल्लाते रहे इस दौरान उन्होंने अपने पिता से फोन पर कहा कि पापा बचा लो। जवान बेटे की पुकार सुनकर उनके बूढे पिता भी मौके पर आ पहुंचे। उन्होंने भी बेटे को बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन फिर भी वो बेटे को बचा नहीं सके। अपनी आंखों के सामने बेटे को डूबते देखते रहे। युवराज के पिता राजकुमार मेहता का कहना है कि युवराज गाड़ी से निकलकर बाहर आया और हिम्मत करके छत पर लेट गया था। वहां से वह 'हेल्प हेल्प' चिल्ला रहा था ताकि को राह चलता आदमी उसकी हेल्प कर पाए! रेस्क्यू टीम आई उसके पास पर्याप्त साधन नहीं थे. एक डिलिवरी बॉय ने रस्सी फेंककर युवराज को बचाने की कोशिश की लेकिन वो भी नाकाम रहा। आखिरकार युवराज ज़िंदगी की हार गए, उनकी जान चली गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार युवराज की मौत दम घुटने से हुई! अब इस घटना की ज़िम्मेदारी चाहे जिस पर डालिए! लेकिन वो सभी युवराज के मुजरिम हैं, जिन्होंने किनारे खड़े होकर युवराज को डूबते देखा है। काश! इनमें कोई ‘फैसल’ होता! जो डूबते युवराज को बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा देता। युवराज को नम आंखों और भीगी पलकों से विदाई! और एक ही मलाल कि काश वहां कोई ‘फैसल’ होता! तो युवराज आज ज़िंदा होते।
