कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए तीखा हमला बोला है। खरगे ने कहा कि पिछले 11 साल में पीएम मोदी ने 72 देशों के 151 विदेश दौरे किए, लेकिन इनका कोई ठोस परिणाम नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि जब भारत को पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब करने के लिए समर्थन चाहिए था, तब कोई देश साथ नहीं आया। खरगे ने विशेष रूप से पाकिस्तान को IMF से मिले 1.4 बिलियन डॉलर के बेलआउट लोन का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के रुख का समर्थन नहीं हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार की विदेश नीति के कारण भारत वैश्विक मंच पर अलग-थलग है।
इसके अलावा, खरगे ने ऑपरेशन सिंदूर को "छोटा युद्ध" बताकर विवाद खड़ा किया और पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत पर सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। हालांकि, सरकार समर्थकों का कहना है कि मोदी के दौरों ने भारत की वैश्विक छवि को मजबूत किया, जैसे G-20, BRICS और UN जैसे मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी।
खरगे का बयान राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें विपक्ष मोदी की विदेश नीति को निशाना बनाकर सरकार की उपलब्धियों पर सवाल उठा रहा है। दूसरी ओर, यह भी तथ्य है कि मोदी ने 45 साल बाद पोलैंड और 43 साल बाद कुवैत जैसे देशों की यात्रा कर द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा दिया। क्या ये दौरे केवल "फोटो खिंचवाने" तक सीमित थे, जैसा खरगे ने कहा, या इनसे भारत की कूटनीतिक स्थिति मजबूत हुई, यह बहस का विषय है।
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