नई दिल्ली, नवंबर 2025 — भारत के प्रख्यात लेखक, देशभक्ति एवं यात्रा साहित्य के लिए जाने जाने वाले डॉ. ऋषि राज ने एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए भारत के सभी 36 राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों और विश्व के सभी सात महाद्वीपों की यात्रा पूरी करने वाले पहले भारतीय बनकर इतिहास रच दिया है।
अंटार्कटिका को अपने अंतिम पड़ाव के रूप में चुनते हुए, डॉ. ऋषि राज ने वहाँ भारतीय तिरंगा फहराया और “एक भारत श्रेष्ठ भारत” का संदेश देते हुए देश की एकता और गौरव का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया।
पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम
अपनी अंटार्कटिका यात्रा के दौरान उन्होंने “धरती माता की रक्षा के संकल्प” वाला एक विशेष बैनर प्रदर्शित किया, जो पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु संवेदनशीलता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इसके साथ ही, सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में, उन्होंने आयरन मैन की तस्वीर वाला बैनर भी दिखाया, जो राष्ट्र के महान एकीकर्ता को उनकी भावनात्मक श्रद्धांजलि थी।
31 वर्षों की सतत तपस्या
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन में अपर महाप्रबंधक के पद पर कार्यरत डॉ. ऋषि राज ने अपनी यात्राओं की शुरुआत वर्ष 1994 में भारतीय रेल से अपनी सेवा के दौरान की।
-
2008: सभी ज्योतिर्लिंग और चार धाम यात्रा
-
2012: कैलाश मानसरोवर यात्रा — वैश्विक यात्रा की नई शुरुआत
-
31 वर्षों में भारत के कोने-कोने व विश्व के सातों महाद्वीपों का भ्रमण
उनकी यह यात्रा सिर्फ भौगोलिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पर्यावरणीय संदेश लेकर चलती रही।
अंटार्कटिका से डॉ. ऋषि राज का संदेश
“हिमालय से अंटार्कटिका तक मैंने भारत की आत्मा को साथ लेकर चला हूँ। यह सिर्फ यात्रा नहीं—एकता, देशभक्ति और पृथ्वी के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। जहाँ भी जाता हूँ, भारत मेरे साथ चलता है।”
28 पुस्तकें और 600 से अधिक लघु फिल्में
एक सफल प्रशासक और यायावर होने के साथ-साथ डॉ. ऋषि राज एक बहुमुखी लेखक भी हैं।
-
इतिहास और देशभक्ति आधारित 28+ पुस्तकें
-
उनके चैनल Exploring India with Rishi पर 600 से अधिक लघु फिल्में, जिनमें भारतीय संस्कृति, धरोहर और राष्ट्रभक्ति को जीवंत रूप से प्रस्तुत किया गया है।
अब युवाओं को राष्ट्रभक्ति व जलवायु जागरूकता के लिए प्रेरित करेंगे
अपनी इस उपलब्धि को वे अब देश के युवाओं को सतत यात्रा, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रभक्ति के लिए प्रेरित करने हेतु समर्पित करने की योजना बना रहे हैं। वे इस रिकॉर्ड को देश-विदेश की प्रमुख रिकॉर्ड बुक्स में दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर चुके हैं।

