नई दिल्ली। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने हालिया विधानसभा चुनावों के नतीजों, बढ़ती महंगाई और देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन ने कहा कि यह समय नई और पुनर्निर्वाचित सरकारों के लिए जिम्मेदार, समावेशी और जनकेंद्रित शासन की दिशा में ठोस कदम उठाने का है।
संगठन के मुताबिक, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में नई सरकारों के गठन की संभावना है, जबकि असम और पुडुचेरी में मौजूदा सरकारों को फिर जनादेश मिला है। जमाअत ने कहा कि देश आर्थिक दबाव, बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, सुरक्षा और सामाजिक न्याय जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में सरकारों को केवल घोषणाओं तक सीमित रहने के बजाय लोगों के जीवन में वास्तविक सुधार लाने पर ध्यान देना चाहिए।
पश्चिम बंगाल की चुनावी प्रक्रिया पर सवाल
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल की चुनावी प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई। संगठन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), कथित तौर पर बड़ी संख्या में मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किए जाने के आरोपों और चुनावी तंत्र के दुरुपयोग से जुड़ी शिकायतों का उल्लेख किया।
बयान में कहा गया कि चुनाव प्रचार के दौरान ध्रुवीकरण वाले माहौल ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। संगठन का कहना है कि जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए इन शिकायतों की पारदर्शी और विश्वसनीय जांच आवश्यक है।
असम में धनबल और दुष्प्रचार का आरोप
असम समेत अन्य राज्यों में चुनावों के दौरान धनबल, दुष्प्रचार और विभाजनकारी भाषा के इस्तेमाल पर भी संगठन ने चिंता व्यक्त की। जमाअत ने कहा कि इस तरह की प्रवृत्तियां लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती हैं और स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव की भावना को ठेस पहुंचाती हैं।
संगठन ने चुनावी प्रक्रिया की निगरानी करने वाली संस्थाओं की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि निष्पक्षता और जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल शर्त है।
विपक्ष को एकजुट होने की सलाह
जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने विपक्षी दलों की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करने वाले दल अपने मतभेदों से ऊपर उठकर एक साझा रणनीति बनाने में नाकाम रहे हैं। संगठन ने विपक्ष से जनहित के मुद्दों पर रचनात्मक, सतर्क और जिम्मेदार भूमिका निभाने की अपील की।
महंगाई से बढ़ी आम आदमी की मुश्किलें
संगठन ने बढ़ती महंगाई और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि को लेकर भी चिंता जताई। हाल में कमर्शियल और घरेलू LPG सिलेंडरों की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का असर छोटे कारोबारियों, रेस्टोरेंट संचालकों और आम परिवारों पर पड़ रहा है।
जमाअत का कहना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों ने परिवहन लागत बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। बिजली और अन्य बुनियादी सेवाओं की महंगाई ने निम्न और मध्यम आय वर्ग की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
संगठन ने केंद्र सरकार से पेट्रोल, डीज़ल और LPG पर एक्साइज ड्यूटी में समयबद्ध कटौती करने तथा राज्य सरकारों से VAT दरों को युक्तिसंगत बनाने की मांग की है। साथ ही, कम और मध्यम आय वर्ग के लिए लक्षित राहत पैकेज की भी सिफारिश की गई है।
भीषण गर्मी को बताया गंभीर संकट
देशभर में बढ़ती गर्मी और लगातार पड़ रही लू पर भी जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने चिंता जताई है। संगठन ने कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर खेतों, निर्माण स्थलों और खुले में काम करने वाले मजदूरों पर पड़ रहा है।
जमाअत ने बढ़ती हीटवेव को पर्यावरणीय क्षरण, वनों की कटाई, अनियंत्रित शहरीकरण और ग्लोबल वार्मिंग से जोड़ते हुए कहा कि प्राकृतिक संतुलन की अनदेखी के गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं।
संगठन ने सरकार से व्यापक हीट एक्शन प्लान लागू करने, पेयजल की उपलब्धता बढ़ाने, सार्वजनिक स्थानों पर छाया और कूलिंग सेंटर बनाने, बाहरी मजदूरों के काम के घंटे विनियमित करने तथा बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाने की मांग की है।
सामूहिक जिम्मेदारी की अपील
अपने बयान के अंत में जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने सरकारों, विपक्षी दलों, संस्थाओं और नागरिक समाज से अपील की कि वे लोकतंत्र को मजबूत करने, महंगाई पर नियंत्रण पाने, पर्यावरणीय संकट से निपटने और आम लोगों के जीवन में राहत पहुंचाने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी के साथ आगे आएं।
