नई दिल्ली। साहित्य अकादमी के सभागार में प्रख्यात लेखक, शिक्षाविद और सांस्कृतिक चिंतक डॉ. सच्चिदानंद जोशी की नई पुस्तक “गूंजे देश राग” का गरिमामय विमोचन समारोह आयोजित किया गया। यश पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक भारत की संस्कृति, परंपरा और विविधताओं को काव्यात्मक शैली में प्रस्तुत करती है। कार्यक्रम में साहित्य, पत्रकारिता, शिक्षा और सांस्कृतिक जगत से जुड़े कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व उपस्थित रहे।
“गूंजे देश राग” एक ऐसी रचना है, जिसमें लेखक ने देश और दुनिया की यात्राओं के अनुभवों को भारतीय भावभूमि के साथ जोड़ते हुए प्रस्तुत किया है। पुस्तक का मूल भाव यह है कि भारत केवल एक भूगोल नहीं, बल्कि भाव, स्मृतियों और संस्कारों की ऐसी धारा है, जो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भी अपने स्वर और रंग के साथ गूंजती रहती है। डॉ. जोशी ने अपनी लेखनी के माध्यम से विभिन्न देशों की यात्राओं, वहां के लोगों, उनकी जीवन शैली और भारतीय दृष्टि से देखे गए अनुभवों को संवेदनशीलता और सहजता के साथ शब्दों में पिरोया है।
विमोचन समारोह में उपस्थित जानी-मानी ट्रैवल ब्लॉगर डॉ. कायनात क़ाज़ी ने पुस्तक पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “गूंजे देश राग” केवल यात्रा वृत्तांत नहीं है, बल्कि यह एक भावनात्मक और सांस्कृतिक यात्रा भी है। उन्होंने कहा कि डॉ. जोशी की लेखनी पाठक को अपने साथ यात्रा पर ले जाती है। मंगोलिया की यात्रा हो या कंबोडिया की, लेखक हर स्थान को भारतीय दृष्टि और संवेदना से जोड़ते हैं, जिससे पाठक को ऐसा अनुभव होता है मानो वह स्वयं उन यात्राओं का हिस्सा हो।
नागरी प्रचारिणी सभा, काशी के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने पुस्तक के एक रोचक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि विदेश यात्रा के दौरान शाकाहारी भोजन की तलाश में लेखक को कई दिलचस्प परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने एक प्रसंग का जिक्र किया, जिसमें शाकाहारी भोजन के नाम पर पहले दिन एक बेहद छोटा अंडा और दूसरे दिन उससे तीन गुना बड़ा अंडा परोसा गया। इस प्रसंग को सुनकर सभागार में उपस्थित श्रोताओं के बीच हल्की मुस्कान और उत्साह का वातावरण बन गया।
पुस्तक चर्चा के दौरान डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि अक्सर हम यह मानते हैं कि अतिथि सत्कार की परंपरा केवल भारत की विशेषता है, लेकिन जब हम अन्य देशों में जाते हैं तो यह देखकर सुखद आश्चर्य होता है कि वहां भी अतिथियों का स्वागत बड़े उत्साह और सम्मान के साथ किया जाता है। उन्होंने कहा कि यात्राएं केवल स्थान बदलने का नाम नहीं, बल्कि यह दृष्टि और अनुभवों को विस्तृत करने का माध्यम भी हैं।
वरिष्ठ पत्रकार कात्यायनी चतुर्वेदी ने भी पुस्तक पर अपने विचार रखते हुए कहा कि यह पुस्तक पाठकों को न केवल नई जगहों से परिचित कराती है, बल्कि भारतीय संस्कृति की गहराई को भी नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर देती है। उन्होंने कहा कि आज के समय में ऐसी रचनाएं महत्वपूर्ण हैं, जो वैश्विक अनुभवों को भारतीय संवेदना के साथ जोड़ती हैं।
इस अवसर पर शिक्षाविद एवं रंगकर्मी मल्लिका जोशी, दिल्ली विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर डॉ. अंजलि सहित अनेक साहित्य प्रेमी और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में यश पब्लिकेशन के निदेशक जतिन भारद्वाज ने सभी अतिथियों और उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया तथा कहा कि इस प्रकार की सार्थक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध पुस्तकों का प्रकाशन समाज को नई दिशा देने में सहायक होता है।
समारोह का वातावरण साहित्यिक ऊष्मा, सांस्कृतिक संवाद और विचारों के आदान-प्रदान से भरपूर रहा। “गूंजे देश राग” के विमोचन के साथ ही यह उम्मीद भी व्यक्त की गई कि यह पुस्तक पाठकों के बीच लोकप्रिय होगी और उन्हें देश तथा दुनिया को एक नई दृष्टि से देखने की प्रेरणा देगी।
