ममता ने प्रधानमंत्री को लिखी दूसरी चिट्‌ठी,अफसरों ने दिया इस्तीफा आखिर क्या है मामला?

बारिश में दमोदम घाटी निगम के डेम से पानी छोड़ने के मुद्दे पर अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र सरकार आमने-सामने हैं. तो वहीँ दूसरी तरफ DVC से जुड़े कई अधिकारियों ने इस्तीफा भी दे दिया है. आपको बता दें ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में आई बाढ़ पर पीएम मोदी को एक और लेटर लिखा है। 2 दिन के अंदर लिखी दूसरी चिट्‌ठी में ममता ने आरोप लगाया है कि दामोदर घाटी निगम ने उनसे सलाह लिए बिना पानी छोड़ा है, जिससे बंगाल के जिले डूब गए है। इससे पहले ममता ने 20 सितंबर को भी पीएम मोदी को चिट्‌ठी लिखी थी। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि दामोदर घाटी निगम यानी DVC के तहत आने वाले डेम से 5 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण बंगाल में बाढ़ आई है। चलिए विस्तार में जानते है आखिर मामला क्या है? ममता की PM को लिखी चिट्‌ठी
1. आपको बता दें कि ममता ने PM मोदी को चिट्‌ठी में लिखा कि केंद्रीय जलशक्ति मंत्री का दावा है कि DVC बांधों से पानी छोड़ा जाना पश्चिम बंगाल सरकार के प्रतिनिधियों से परामर्श लेने, दामोदर घाटी रिजर्वायर रेग्युलेशन कमेटी की सहमति और सहयोग से किया गया था, मैं इससे असहमत हूं। 2. सभी अहम फैसले केंद्रीय जल आयोग, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार आम सहमति के बिना एकतरफा लेती है। कभी-कभी राज्य सरकार को बिना सूचना दिए पानी छोड़ दिया जाता है। हमारे विचारों का सम्मान नहीं किया जाता। 3. बांधों से करीब 9 घंटे तक पानी छोड़ा गया। बाढ़ को मैनेज करने के लिए हमें महज 3.5 घंटे ही मिले थे, जो असरदार डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए काफी नहीं थे। बंगाल सरकार और केंद्र के बीच चल रही जुबानी जंग के बीच राज्य के बिजली सचिव शांतनु बसु ने DVC बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है। तो वहीं बसु के अलावा बंगाल के सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर ने भी रेगुलेशन कमेटी से इस्तीफा दे दिया है। ममता ने की थी आर्थिक सहायता की मांग
20 सितंबर को पीएम मोदी को लिखे अपने पत्र में ममता ने दावा किया है। ममता ने कहा, 'मानव निर्मित बाढ़ से राज्य के 50 लाख से ज्यादा लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। अगर लापरवाही जारी रही, तो राज्य निगम के साथ सभी संबंध तोड़ देगा। यह मानव निर्मित बाढ़ है, जो 2009 के बाद से दामोदर नदी में आई सबसे भयानक बाढ़ है। बाढ़ से हुई तबाही से निपटने के लिए केंद्र सरकार को आर्थिक सहायता राशि देनी चाहिए।' हम आपको बता दें कि जैसे ही ममता ने प्रधानमंत्री मोदी ने को पत्र लिखा वैसे ही केंद्रीय जल एवं ऊर्जा मंत्री सीआर पाटिल को जवाब दिया। ममता को केंद्रीय मंत्री का जवाब उन्होंने बताया कि डीवीआरआरसी राज्य के प्रतिनिधियों के परामर्श से पानी छोड़ने का निर्णय लेता है. केंद्रीय मंत्री ने कहा, समिति ने बंगाल में बाढ़ को रोकने का भी प्रयास किया, लेकिन शनिवार को ममता बनर्जी ने मंत्री के पत्र के जवाब में पीएम मोदी को दूसरा पत्र लिखा. इसी के साथ DVC से पानी छोड़ने पर ममता बनर्जी नाराज क्यों हैं ये भी जान लेते है? DVC से पानी छोड़ने पर ममता को आपत्ति
ममता बनर्जी ने कहा, ”मुझे निजी तौर पर लगा कि ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ने की कोई जरूरत नहीं है. अन्यथा दक्षिण बंगाल में बाढ़ की स्थिति इतनी भयावह नहीं होती. इसलिए मुझे लगता है कि केंद्रीय मंत्री का यह बयान कि बाढ़ को नियंत्रित करने के लिए सभी प्रयास किए गए, पूरी तरह से सही नहीं है. हम आपको बता दें कि करीब 50 लाख लोग इस बाढ़ से प्रभावित हुए है. जिसमें ममता सरकार और केंद्र सरकार एक दूसरे को ज़िम्मेदार बता रहे है. अब देखना होगा ममता की दूसरी चिट्टी पर PM मोदी का क्या रिएक्शन आता है?

Post a Comment

Previous Post Next Post